कसूंबी सारी पहरें सोधें सनी

Madhury Shata — श्री वंशी अलि

Verse 10 of 13

नेह खेत की द्रुमलता, सहचरी मोहनलाल। दृग करि करुणा रूपजल, सींचत राधा बाल॥ - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (102.1) खेत की द्रुमलता, मित्र मोहनलाल। दृग कारी करुणा रूपजल, सिंचत राधा बल.. - श्री वंशी अली, माधुर्य शत (102.1)
कसूंबी सारी पहरें सोधें सनीप्रीति की रीति रसिकनी जानैं