कसूंबी सारी पहरें सोधें सनी
Madhury Shata — श्री वंशी अलि
Verse 4 of 13
हित की बात लाड़िली जानैं।
नेह निबाहत बिनु नेहिनु सों, मधुर बात हिय सानैं॥ [1]
दोस न लेत दोस पूरन को, प्रीति आगरी ठानैं।
जय श्री बंशी अलि स्वभाव याको यह, रंचक चाह बिकानैं॥ [2]
- श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (3)
हिट केस लड़ना चाहिए. नेह निबाहत बिनु नेहिनु सों, मधुर बात हिय सनैन.. [1] दोस न लेट दोस पूरन को, प्रीति अगारी थनैन। जय श्री बंशी अली स्वभाव याको हां, रंचक चाह बिकणै.. [2] - श्री बंशी अली, मधुर शत (3)