लालन मन राग भाल बैंदी लाल

Madhury Shata — श्री वंशी अलि

Verse 6 of 13

लालन मन राग भाल बैंदी लाल। कुंचित कच छबि देत छबीली, नवल चंद पच्यौ मानौं बादर जाल॥ [1] मानौं भृकुटि-लता पाक्यौ मुख, सर फूल्यो पहुप मृनाल। [2] प्रियकर कृत सोभित जै श्री वंशीअलि, मनौं मुख राजत मदन मराल॥ [3] - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (5) ललन, तुम्हारा हृदय कितना भी मजबूत क्यों न हो, प्रिय पुत्र। कुंचित कच छबि देत छबीली, नवल चंद पच्यौ मनौं बादर जल। [1] मनौं भृकुटि-लता पाक्यौ मुख, सर फूल्यो पाहुप मृणाल। [2] शोभित जय श्री वंशियाली, मनौं मुख रजत मदन मराल प्रियकर.. [3] - श्री वंशी अली, मधुर शत (5)
कसूंबी सारी पहरें सोधें सनीकसूंबी सारी पहरें सोधें सनी