कसूंबी सारी पहरें सोधें सनी

Madhury Shata — श्री वंशी अलि

Verse 7 of 13

लालन तन नैनन भरि चितई। मुरझि परयौ सुधि देह बिसारी, अनी दृग हियेरे परै गई॥ [1] अधर फुरक श्री राधा गुन गाबत, कबहू कहाय कही। वंशी अलि स्वामिन अति कोमल, हियरे लाय लई॥ [2] - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (21) ललन तन नैनन भारी चितई। मुराजि परयु सुधि देह बिसारि, अनी दृग हिरे पराई गाई।।[1] अधार फुरक श्री राधा गुण गबत, कबहु कहै कहि। वंशी अली स्वामी अति कोमल, बाल लाये.. [2] - श्री वंशी अली, माधुरी शत (21)
लालन मन राग भाल बैंदी लालकसूंबी सारी पहरें सोधें सनी