कसूंबी सारी पहरें सोधें सनी

Madhury Shata — श्री वंशी अलि

Verse 8 of 13

गौर-स्याम अभिराम देषे बिनु नाहिन चैन परै। हाइ-हाइ कित जाऊँ सखी री हियरैं अगिन बरै॥ [1] ज्यौं ज्यौं सुनियत नाम दुहुनि कौ होत है खरै-खरै। जैश्री वंशीअलि लोचन तरफत अति यहु दुष कौन भरै॥ [2] - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (19) गौरा-स्याम अभिराम देशे बिनु नहिं चैन पराई। आपके कितने दोस्त हैं? जयश्री वंशीय लोचन तरफफत अति यहहु दुश कौन भरै.. [2] - श्री वंश अली, माधुरी शत (19)
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