मोहि कृपा करि दीजिये, अंग संग की सेवा।

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 16 of 65

मोहि कृपा करि दीजिये, अंग संग की सेवा। अहो बिहारिनि लाडिली, मेरें तुम देवा॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सुरत सुख (29) मोहि मेरी सेवा करो। हे बिहारिणी लाडिली, तुम ही मेरी भगवान हो.. - श्री हरिव्यास देवचारी, महावाणी, सुरत सुख (29)
(दोहा)॥ दोहा॥