सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 33 of 65

रसिकन के हित कारने, बिसद बिहार-निहारि। जोरी गोरी साँवरी, अनहोनी परम उदारि॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (55) रसिकन का कल्याण करो, बिसाद बिहार-निहारी। सबसे निष्पक्ष, सबसे निष्पक्ष, सबसे उदार... - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (55)
सुखकारी सबके सदाअंग अंग सोभा जु पर, वारौं काम करोरि।