सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 32 of 65

पराभक्ति रस वर्धिनी, श्यामा सब सुख दैन। रसिक मुकुट मनि राधिका, जय नव नीरज नैन॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (51) पराभक्ति रस वर्धिनी, श्यामा सब सुख देती है। रसिक मुकुट मणि राधिका, जय नव नीरज नैन.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (51)
जै जै आनन्द कन्दनी, श्रीहरिप्रिया किसोरिसुखकारी सबके सदा