सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 38 of 65

(दोहा) अहो बिहारिनि कहत बलि, सौंह तिहारी मोहि। जो जोई तुम करति हौ, भावत मो सो सो हि॥ (पद) जोई जोई करति तुम प्यारी सोई सोई मो मन मानें। अहो बिहारिनि सौंह तिहारी उर प्रतीति अति आनें॥ [1] जब तुम नेंक रुखोंई चितवति प्रनय-कोप-रस सानें। श्रीहरिप्रिया स्वामिनी जहिं छिन मेरोई जी जानें॥ [2] - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सहज सुख (66) श्रीलालजू कह रहे हैं - (दोहा) हे बिहारिणी लाड़ली जू! मैं आपकी सौगंध खाकर कहता हूँ, मैं आपकी बलिहारी जाऊँ। जो-जो कार्य आप करती हैं, मुझे भी वही-वही अच्छे लगते हैं। (पद) हे प्यारीजू ! जो जो कार्य आप करती हैं मेरे मन को भी वही वही अच्छे लगते हैं। अहो, विहारिनि लाड़िली जी, मैं आपकी सौगन्ध खाकर कहता हूँ, आप इसके अतिरिक्त अपने हृदय में और किसी प्रकार के विश्वास को बिल्कुल भी स्थान न दें। [1] परन्तु जब आप मानवती होकर तनिक रूखी दृष्टि से मेरी ओर देखती हो, तो हे स्वामिनी जू, उस क्षण में जो मेरे हृदय पर बीतती है, मेरा हृदय ही जानता है, इस बात की श्रीहरि प्रिया जू साक्षी है। [2]
सुखकारी सबके सदा(दोहा)