सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 43 of 65

अलक-लड़ैती लाड़ली, अलक लड़ौ सुकुंवार। अलक लड़ौ मोहन महल, अलक-लड़ोइ बिहार॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (81) अलका-लड़ो प्रिये, अलका लड़ो सुकुंवर। अलक लड़ौ मोहन महल, अलक-लड्डौ बिहार.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (81)
सुखकारी सबके सदाजय जय चतुरि चूड़ामनी