सुखकारी सबके सदा
Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य
Verse 5 of 65
प्रिया बदन सुखमा सदन, रह्यो प्रेम परिपूरि।
जा मधि प्रीतम प्राण की, सरबस जीवनि मूरि॥
- श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (05)
प्रिया बदन सुखमा सदन, रहो प्रेम परिपुरी। जा मधि प्रीतम प्राण की, सरबस जीवनि मुरी.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (05)