सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 53 of 65

सुखकारी सबके सदा, प्रानन के प्रतिपाल। सर्बस जीवन सखिन की, नवल लाड़िली लाल॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, उत्साह सुख (146) जीवन के हर पल, हर किसी के लिए हमेशा खुशी का स्रोत। सरबस जीवन सखिन की, नवल लड़ैली लाल.. - श्री हरिव्यास देवचारी, महावाणी, उत्साह और प्रसन्नता (146)
सुखकारी सबके सदायह रस दुर्लभ हूँ ते दुर्लभ, सुलभ नित्य रहत है ताहि।