सुखकारी सबके सदा

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 63 of 65

श्रीराधा पद कमल ते, नूपुर कलरव होय। निर्विकार व्यापक भयो, शब्द ब्रह्म कहि सोय॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (16) श्री राधा के चरण कमल हैं, उनके पायल झिलमिला रहे हैं। विकार व्याप्त हो गया, ब्रह्म शब्द कहीं सो गया.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सिद्धांत सुख (16)
मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर।सुखकारी सबके सदा