मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर।

Mahavani — श्री हरिव्यास देवाचार्य

Verse 62 of 65

मन मोहन मन मोहनी, सहज ही स्यामल गौर। श्री हरिप्रिया रसिक जन कौ धन, जोरि युगल किशोर॥ - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावानी, सेवा सुख (24) मन मोहक है, मन मोहक है, आँखें सहज ही आकर्षित हो जाती हैं। श्री हरिप्रिय रसिक जन कौ धन, जोरी युगल किशोर.. - श्री हरिव्यास देवाचार्य, महावाणी, सेवा सुख (24)
सुखकारी सबके सदासुखकारी सबके सदा