छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग
Matiram Satsai — श्री मतिराम
Verse 3 of 10
छाँड़ि नेह नंदलाल कौ, हम नहिं चाहत जोग।
रंग-बाति क्यों लेत हैं, रतन-पारखी लोग॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (622)
चंदै नेह नंदलाल कौ, हमको योग नहीं चाहिए। रत्नों के पारखी, आप इतनी देर क्यों कर रहे हैं.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (622)