छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग

Matiram Satsai — श्री मतिराम

Verse 4 of 10

कोटि-कोटि मतिराम कहि, जतन करौ सब कोइ। फाटे मन अरु दूध में, नेह न कबहूँ होइ॥ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (70) कोटि-कोटि मतिराम कहें, हर संभव प्रयास करें। भाग्य मन अरु दूध पुरुष, नेह न न बहुं होई।।- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (70) श्री मतिराम जी कहते हैं कि कोई कितना भी प्रयास कर ले, अशुद्ध मन से शुद्ध माखन यानी श्री राधा-कृष्ण का प्रेम कभी नहीं हट सकता।
छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोगछाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग