छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग
Matiram Satsai — श्री मतिराम
Verse 5 of 10
मो मन तम-तोमहि हरो, राधा को मुख चंद।
बढ़े जाहि लखि सिंधु लौं, नंदनंदन आनंद॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (1)
मो मन तम-तमहि हरो, राधा को मुख चंद। बधाई हो लखि सिंधु लौं नंदनंदन आनंद.. - श्री मतिराम मतिराम सतसई (1)