छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग
Matiram Satsai — श्री मतिराम
Verse 6 of 10
मुंज गुंज के हार उर, मुकुट मोर पर-पुंज।
कुंज बिहारी बिहरियै, मेरेई मन-कुंज॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (2)
नाद, मुकुट और पर-समूह की प्रत्येक ध्वनि। कुंज बिहारी बिहारियै, मेरे मन-कुंज.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (2)