छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग

Matiram Satsai — श्री मतिराम

Verse 7 of 10

पगीं प्रेम नंदलाल कैं, हमैं न भावत जोग। मधुप राजपद पाइकै, भीख न माँगत लोग॥ - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (621) पेज प्रेम नंदलाल कैन, हमीं न भावत जोग। मधुप राजपाद पाइकाई, जो नहीं मांगते भीख.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (621)
छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोगछाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग