छाँड़ि नेह नंदलाल कौ हम नहिं चाहत जोग
Matiram Satsai — श्री मतिराम
Verse 8 of 10
राधा मोहन-लाल को, जाहि न भावत नेह।
परियौ मुठी हज़ार दस, ताकी आँखिनि खेह॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (4)
राधा मोहना-लाल को, जाहि न भावत नेह। परियौ मुथि हजार दास, ताकी आंखिनी केह.. - श्री मतिराम, मतिराम सतसई (4)