मैं घनश्याम को देखता जा रहा हूँ
Mohan Mohini — श्री बिंदु जी
Verse 3 of 6
कन्हैया को एक रोज़ रोकर पुकारा,
कहा उनसे जैसा हूँ अब हूँ तुम्हारा। [1]
वो बोले साधन किये तूने क्या है,
मैं बोला किसे तुमने साधन से तारा॥ [2]
वो बोले कि दुनिया में आकर किया कुछ,
मैं बोला कि अब भेजना मत दुबारा। [3]
वो बोले परेशां हूँ तेरी बहस से,
मैं बोला ये कहदो तू जीता मैं हारा॥ [4]
वो बोले कि ज़रिया तेरा क्या है मुझ तक,
मैं बोला कि दृग ‘बिन्दु’ का है सहारा। [5]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
एक दिन रोजा ने चिल्लाकर कन्हैया से कहा, 'अब मैं जैसी हूं, वैसी ही तुम्हारी हूं।' [1] उसने कहा साज से क्या किया, मैंने कहा साज से क्या किया.. [2] दुनिया में आकर उसने कुछ कहा, मैंने कहा दोबारा मत भेजना। [3] उन्होंने कहा, मैं परेशान हूं तुम्हारी बहस से, मैंने कहा, तुम कहते हो जीत गए, मैं हार गया.. [4] उन्होंने कहा, मुझ तक पहुंचने का क्या है जरिया, मैंने कहा, 'बिंदु' ही सहारा है. [5] - श्री बिन्दु जी, मोहन मोहिनी