मुक्ति रहति द्वारें खरी, आज्ञा बस करज़ोर,
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Verse 10 of 23
मुक्ति रहति द्वारें खरी, आज्ञा बस करज़ोर,
किंकर के किंकर सोऊ, चितवत नहिं दृग कोर॥
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.3)
मुक्ति के द्वार पर रहो, आज्ञा है बस दृढ़ रहो, एक-एक की सुनो, चिंता मत करो, चिंता मत करो.. - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (14.3)