नागिरि नागर भाव तैं, मंगल रूप रसाल।

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Verse 9 of 23

नागिरि नागर भाव तैं, मंगल रूप रसाल। नित मंगल वृन्दाविपुन, नित्य फाग रस ख्याल॥ - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (92.2) यह सभ्य शहर बने, इसे शुभ स्वरूप दिया जाए। नीता मंगल वृंदाविपुन, नित्य फाग रस ख्याल.. - श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (92.2)
अष्ट सिद्धि नव निद्धि जिहीं, टहल करत नित धाम।मुक्ति रहति द्वारें खरी, आज्ञा बस करज़ोर,