ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप

Nagaridas Extras —

Verse 19 of 23

ललित मोहिनी कुंज में, दई पुंज दरसाय। ठाकुर दासि नित सहचरी, सेवत हिय हुलसाय॥ - श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (3) ललित मोहिनी कुंज पुरुष, दाई पुंज दरासय। ठाकुर दासी नित्य सखी है, पति की सेवा करती है.. - श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी के वचन, साखी (3)
ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूपललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप