ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप
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Verse 21 of 23
नादी नृत्य निपुन बहु बांदी, स्वादी मिल्यौ न कोई।
श्रीनागरीदासि अनन्य बिन, सब गये चतुर गथ खोई॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (12)
नदी नृत्य में कोई कुशल नहीं है, लेकिन बहू बहुत रुचिकर है। श्रीनगर में बिना किसी के, सब भूल गए चतुर पथ.. - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी के शब्द, मित्र (12)