ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप
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Verse 22 of 23
रोग भोग सुख देह दुख, कै जाडौ कै घाम।
श्रीनागरीदास परपंच तजि, भजि श्रीस्यामा स्याम॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (14)
शरीर के रोग, सुख, दुःख और कष्टों का मूल क्या है? श्रीनगरीदास परपंच तजि, भजी श्रीस्याम स्याम.. - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जी की वाणी, साखी (14)