ललित मोहिनी कुंज में राजत अद्भुत रूप
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Verse 23 of 23
ठाकुरदास निज महल में, केलि नई नित होइ।
श्रीस्वामी की कृपा बिनु, नहिं पहुँचै तहँ कोइ॥
- श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी की वाणी, साखी (6)
ठाकुरदास हर रात अपने महल में ही बिताते थे। श्री स्वामी की कृपा के बिना कोई वहां नहीं पहुंच सकता.. - श्री ठाकुर दास, श्री ठाकुर दास जी के शब्द, मित्र (6)