हीरा कौं ललिचात लिवासी
Nagaridev Vani — श्री नागरीदेव
Verse 1 of 15
आप कहावत रसिक कृपन मति, कायर मत्सर लोभ लिवास।
ठग बग डिंभी कपट प्रेम बिन, तिनहि न मन विस्वास॥
- श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जु की वाणी (9)
एपी कहावत रसिक कृपाण मति, क्यार मत्सर लोभ लिवास। मन में कोई छल, कपट, कोई प्रेम, कोई विश्वास नहीं.. - श्री नागरीदेव जी, श्री नागरीदेव जू की वाणी (9)