श्री नागरीदेव जु की वाणी
Nagaridev Vani
श्री नागरीदेव · 15 verses · Braj
- 1. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 2. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 3. चरनकमल रज सेइहौं, मन-बच-क्रम यह आस।
- 4. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 5. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 6. लै करुवो कौपीन कामरी, कुंजनि कुंजनि कूल विलास।
- 7. मुसिक्यात जात सखी कहत बात
- 8. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 9. श्री नागरीदासि अनन्यनि कौ गढ़, बन बाँकौ कहा कोऊ पावै।
- 10. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 11. हीरा कौं ललिचात लिवासी
- 12. श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत
- 13. श्रीगुरु सन्धि सुभाव न पावत
- 14. अलमस्त रहैं अलबेले लाल, लाडिली के रसमाते
- 15. बिहारिनि लाडिली सुख रासि