छबीले नील घन की पूतरी

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 10 of 23

नंद भवन को भूषण माई। यशुदा को लाल, वीर हलधर को, राधारमण सदा सुखदाई॥ [1] इन्द्र को इन्द्र देव देवन को, ब्रह्म को ब्रह्म अधिक अधिकाई। काल को काल, ईश ईशन को, वरुण को वरुण, महा बलजाई॥ [2] शिव को धन, संतन को सरबस, महिमा वेद पुराणन गाई। ‘नंददास’ को जीवन गिरिधर, गोकुल मंडन कुंवर कन्हाई॥ [3] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली नन्दभवन को भूषण माई। यशुदा को लाल कहते हैं, वीर को हलधर कहते हैं, राधारमण सदैव प्रसन्न रहते हैं। [1] इंद्र को इंद्र देव देव कहा जाता है, ब्रह्मा ब्रह्मा के समान हैं। कल कल है, ईश ईशान है, वरुण वरुण है, मह बलजय है.. [2] धन शिव है, सरबस संतान है, महिमा वेद और पुराण है। 'नंददास' का जीवन गिरिधर, गोकुल मंडन कुँवर कन्हाई को समर्पित था.. [3] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली
छबीले नील घन की पूतरीयमुना पुलिन सुभग वृन्दावन