यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 11 of 23

(राग सारंग) यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन, नवल लाल श्रीगोवर्द्धन धारी। [1] नवल कुँज नवल वन कुसुमित, नवल नवल वृषभानु दुलारी॥ [2] नवल हास नवल छबि क्रीड़त, नवल हुलास करत सुखकारी। [3] नवल श्री विठ्ठलनाथ कृपाबल, नंददास निरखत बलिहारी॥ [4] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली (राग सारंग) यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन, नवल लाल श्री गोवर्धन धारी। [1] नवल कुंज नवल वन पुष्प, नवल नवल वृषभानु दुलारी। [2] नवल में नवल छवि बनी है, नवल अच्छे कर्म कर रहे हैं। [3] नवल श्री विट्ठलनाथ कृपाबल, नंददास निरखत बलिहारी.. [4] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली
छबीले नील घन की पूतरीचाँपत चरन मोहनलाल