चाँपत चरन मोहनलाल

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 12 of 23

[राग विहाग] चाँपत चरन मोहनलाल। पलंग पौढीं कँवरि राधे सुन्दरी व्रजवाल॥ कबहुँ कर गहि नैन लावत कबहुँ छुवावत भाल। ‘नंददास’ प्रभु छवि निहारत प्रीति के प्रति पाल॥ - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली [राग विहागा] चनपत चरण मोहनलाल। शय्या, वनस्पति, कुमारी राधे, सुन्दर व्रजवल... कब देखूँ तुम्हें, कब छूऊँ तुम्हें। 'नंददास' प्रभु की छवि निहारते, प्रेम का क्षण... - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली
यमुना पुलिन सुभग वृन्दावनदेखों देखों री नागरनट