देखों देखों री नागरनट
Nanddas Granthavali — श्री नंददास
Verse 13 of 23
(राग रामकली व राग केदारौ)
देखों देखों री नागरनट, निर्तत कालिंदी तट,
गोपीन के मध्य राजै मुकुट लटक। [1]
काछिनी किंकिनी कटी, पीताम्बर की चटक,
कुंडल किरण रवि रथकी अटक॥ [2]
तत-थेई, ता-ता थेई, शब्द सकल घट,
उरप तिरप गति, पग की पटक। [3]
रास मध्य राधे राधे, मुरली में येई रट,
‘नंददास’ गावै तहाँ निपट निकट॥ [4]
- श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (119)
(राग रामकली वी राग केदारौ) कालिंदी के तट पर बने नगरनाट को देखो, गोपियों के बीच लटका हुआ राजमुकुट। [1]. [3] रस मध्य राधे राधे, मुरली में यह सुनाओ, 'नंददास' पास में गाते हैं.. [4] - श्री नंददास, नंददास ग्रंथावली, पदावली (119)