छबीले नील घन की पूतरी

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 5 of 23

जद्यपि नित्य किसोर हरि, बदत वेद इमि बैन। सबै वयस ब्रज देन सुख, प्रगटे पंकज नैन॥ - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (5.2) यद्यपि नित्य किशोर हरि, बदत वेद इमी बान। सबै व्यास ब्रज देन सुख, प्रगटे पंकज नैन.. - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भाषा दशम स्कंध (5.2)
छबीले नील घन की पूतरीजाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत