जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 6 of 23

(राग विलावल) जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटत, शम्भु रटत शेष रटत। नारद शुक व्यास रटत, पावत नहीं पार री॥ [1] ध्रुवजन प्रह्लाद रटत, कुंति के कुँवर रटत। द्रुपद सुता रटत नाथ, अनाथन प्रतिपाल री॥ [2] गणिका गज गीध रटत, गौतम की नारि रटत। राजन की रमणी रटत, सुतन दै दै प्यार री॥ [3] नन्ददास श्रीगोपाल, गिरिवरधर रूप जाल। जसोदा कौ कुँवर लाल, राधा उरहार री॥ [4] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (1) (राग विलावाला) जकौन वेद रटत् ब्रह्मा रटत्, शम्भु रटत् शेष रटत्। नारद शुक व्यास रटत, पावत नहीं पार री..[1] ध्रुवजन प्रह्लाद रटत, कुन्ती के कुँवर रटट। द्रुपद सुता रटत नाथ, अनाथन प्रतिपाल री.. [2] गणिका गज गिध रटत, गौतम की पत्नी रटत। राजन का खूबसूरत गाना सुतां दै दै प्यार री. [3] नंददास श्रीगोपाल, गिरिवरधर रूप जल। जसोदा कौ कुँवर लाल, राधा उरहर री.. [4] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (1)
छबीले नील घन की पूतरीजो गिरि रुचे तो वसो श्री गोवर्धन