जो गिरि रुचे तो वसो श्री गोवर्धन

Nanddas Granthavali — श्री नंददास

Verse 7 of 23

(राग काफ़ी व बिलावल) जो गिरि रुचे तो वसो श्री गोवर्धन, गाम रुचे तो वसो नंदगाम। [1] नगर रुचे तो वसो श्री मधुपुरी, सोभा सागर अति अभिराम॥ [2] सरिता रुचे तो वसो श्री जमुन तट, सकल मनोरथ पूरण काम। [3] ‘नन्ददास’ कानन रुचे तो, वसो भूमि वृंदावन धाम॥ [4] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (22) (राग काफी वी बिलावाला) जो गिरि रुचे तो वासो श्री गोवर्धन, गम रुचे तो वासो नंदगाम। [1] यदि नगर का अभिरुचि है तो श्री मधुपुरी हो, अति प्रसन्न शोभा सागर हो.. [2] यदि नदी का अभिरुचि हो तो श्री जामुन तट हो, सकल मनोरथ पुराण काम। [3] यदि आप 'नंददास' कानन में रुचि रखते हैं तो वासो भूमि वृन्दावन धाम.. [4] - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, पदावली (22)
जाकौं वेद रटत ब्रह्मा रटतछबीले नील घन की पूतरी