छबीले नील घन की पूतरी
Nanddas Granthavali — श्री नंददास
Verse 8 of 23
कै ह्वै रहौं द्रुम गुल्म लता बेली बन माहीं।
आवत जात सुभाय परै मोपै परछाहीं॥
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भँवर गीत (67.1)
मैं ढोल, घंटा, पेट क्यों बनूँ? आवत जात सुभाय पराई मोपै कथहिं.. - श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, भंवर गीत (67.1)