श्री नरहरि दास निरखि तृण तोरति
Narahari Dev Vani — श्री नरहरि देव
Verse 3 of 3
श्री नरहरि दास निरखि तृण तोरति, यह छवि बरनी न जाए।
नैंननि भरी शोभा रस पीवत, पीवत मन न अघाइ॥
- श्री नरहरि दास, श्री नरहरी देव जी की वाणी (8)
श्री नरहरि दास निरखि त्रिन तोरति, ऐसी छवि मत बनाओ। नैननि भारी शोभा रस पीवत, पीवत मन न अघाई.. - श्री नरहरि दास, श्री नरहरि देव जी की वाणी (8)