अंवर कंवर जौ जुरै रुखौउ उत्तम भोग
Nem Battisi — श्री हित दामोदर दास
Verse 11 of 13
सिर काटौ पावक जरौ बूड़ि मरौ विष खाउं।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै अनत न कित हूँ जाउँ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (10)
मैं अपना सिर काट लूंगा और अपनी कली को मारकर विष खा लूंगा। श्री वृन्दावन छन्दै कै अनत न कित हुन जौं.. - श्री हित दामोदर दास, नाम बत्तीसी (10)