भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 11 of 34

मान बडाई ईर्षा, हरष शोक दुखदाय। चतुर शिरोमनि लाडिली, इन सों लेउ बचाय॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (3) अभिमान, ईर्ष्या, खुशी, दुःख और उदासी महसूस करना। चतुर शिरोमणि लाडिली, इन सों लेऊ बचाय.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री राधा करुणावली (3)
भुजा परस्पर अंश देमेरी सरबस जीवन प्यारी