मेरी सरबस जीवन प्यारी
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 12 of 34
(राग भैरवी)
मेरी सरबस जीवन प्यारी।
पल्कान्तर ही ओट होय तब
विह्वल अति ही होत विहारी॥ [1]
केवल कृपा दृष्टिसे मिलि है
चरनशरन महिमा अतिभारी।
अलीमाधुरी कों अपनाई
स्वामिनि अपनी ओर निहारी॥ [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, मंगल (12)
(राग भैरवी) मेरे प्रिय! कुछ क्षणों के बाद पथिक अत्यंत व्याकुल हो जाता है.. [1] उनकी कृपा मात्र से उनके चरणों की शरण लेने की महिमा बहुत भारी है। अली माधुरी कौन हैं, अपनी स्वामिनी अपना या निहारी.. [2] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, मंगल (12)