भुजा परस्पर अंश दे
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 13 of 34
नित्य कुञ्ज बृन्दा विपन, सब ही रस को सार।
आनंद अहलादन दोऊ, विहरत नित्य बिहार॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी
नित्य कुंज बृंदा विपन, सब सार ही सार है। आनंद आह्लादन युगल, विहार नित्य बिहार.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी