भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 14 of 34

नित्य विहारनि लाडली, नित्यविहारी लाल। युगल केलि रसमाधुरी, आनंद रूप रसाल॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, युगल केलि रस मंजरी (1) नित्य विहारी प्रिये, नित्य विहारी लाल। युगल केलि रसमाधुरी, आनंद रूप रसाल.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, युगल केलि रस मंजरी (1)
भुजा परस्पर अंश देप्यारे प्रेम भूमि श्री वृंदावन