प्यारे प्रेम भूमि श्री वृंदावन
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 15 of 34
(राग झिंझोटी)
प्यारे प्रेम भूमि श्री वृंदावन॥
यहां के जड़ चेतन सब प्रेमी इनके भाव भरे रस मय तन।
साधन साध्य यहां नहीं कोई केवल कृपापत्र सबही जन॥ [1]
प्रेम प्रवाह रसिक जन प्यारे सरवस तिनके विपन परम धन।
अलीमाधुरी अति सुखसागर श्रीमुख महिमा कहत मगन मन॥ [2]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री प्यारी जी की गेंद लीला (23)
(राग झिंझोटी) प्रिय प्रेम भूमि श्री वृन्दावन... यहाँ सभी चेतन और निर्जीव प्रेमियों के शरीर भावनाओं से भर जाते हैं। यहाँ कोई साधन उपलब्ध नहीं है, केवल दयालुता का पत्र है.. [1] प्रेम की धारा, प्यारे लोग, सभी के प्यारे, परम धन। अली माधुरी अति सुखसागर श्रीमुख महिमा कहत मगन मन.. [2] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री प्यारी जी की बाल लीला (23)