भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 17 of 34

साधन धर्म न भटकना, अन्त न पावे कोय। श्यामा जू की कृपा सौं, जो कछु होय सो होय॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (6) साधन न भटके और साध्य न मिले। जो कुछ होता है, श्यामा जू की कृपा से होता है... - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (6)
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