भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 18 of 34

सहचरि पलक विसारि के, निरषै श्यामा श्याम। अंग अंग रस माधुरी, नैन दिये विसराम॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्रीनिकुञ्ज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (34) पलक विसारि के साथी, निरजन श्याम श्याम। अंग अंग रस मधुरी, नैन दीया विश्राम.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री निकुंज प्रकाश अष्टयाम मानसी सेवा (34)
भुजा परस्पर अंश देभुजा परस्पर अंश दे