भुजा परस्पर अंश दे

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 2 of 34

अपनी ओर निहारि के, कृपा दृष्टि जो होय। तो प्यारी वनि है भले, साधन और न कोय॥ - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (13) जो भी हो आपकी या निहारी की मेहरबान नज़र. आवाज कितनी मधुर है, भले ही कोई दूसरा साधन न हो.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री राधा करुणावली (13)
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