भुजा परस्पर अंश दे
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 3 of 34
भुजा परस्पर अंश दे, मंद मंद मुसकाय।
प्यारी पीतम रस भरे, अंग-अंग रस छाय॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी
भुज धीरे-धीरे मुस्कुराते हुए जवाब देता है। प्रिय पीतम रस से भरा है, अंग-अंग रस से भरा है.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी