श्यामा प्यारी जय जय श्रीराधा

Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी

Verse 22 of 34

(राग मारू) श्यामा प्यारी जय जय श्रीराधा। करुणा सागर शील उजागर सुंदर रूप अगाधा॥ [1] श्याम सुंदर की प्रेम पियारी प्रानन की सुख साधा। अली माधुरी सरण तिहारी मेटौ भव की बाधा॥ [2] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, मंगल (14) (राग मारू) श्यामा प्यारी जय जय श्री राधा। करुणा के सागर, शील उजागर, सुन्दर रूप और गहराई। [1] श्याम सुंदर का प्यारा, प्रियतम, जीवन का सुख। अली माधुरी सरन तिहारी मेतो भव की बाधा.. [2] - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, मंगल (14)
भुजा परस्पर अंश देभुजा परस्पर अंश दे