भुजा परस्पर अंश दे
Nikunj Keli Madhuri — श्री अली माधुरी
Verse 23 of 34
श्यामा प्यारी लाड़िली, जानत सब कौ भाव।
मेरे तो तुम एक हो, और न कोउ उपाव॥
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा करुणावली (7)
श्यामा एक प्यारी योद्धा है, जो सब कुछ जानती है। तुम ही तो हो मेरे, दूसरा कोई उपाय नहीं.. - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केली माधुरी, श्री राधा करुणावली (7)